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फिल्म: रागिनी, १९५८
संगीत: ओ. पी. नय्यर
गान: किशोर कुमार, आशा भोंसले
अभिनय: किशोर कुमार, पद्मिनीमैं बंगाली छोकरा करूँ प्यार को नोमोश्कारम
मैं मद्रासी छोकरी मुझे तुमसे प्यारम
हमरे बंगलादेश में हर गोरी के लंबे बाल
लुचिर ओपार पोड़े दाल लोक्खी नाच ताल ताल खाय शुधु माछ दाल खाय गो, शुधु खाय गो
हमरे बंगलादेश में हर गोरी के लंबे बाल
आज तो हर बाज़ार में सैयां मिलता नकली माल
करुँगी तेरे वास्ते सोलह सिंगारम
मैं मद्रासी…
तुम तो शुनो बंगाली गाना मनुवा जाए झूम
शोखी गो तोमाय केमोन कोरे पाबो
तुम तो शुनो बंगाली गाना मनुवा जाए झूम
थे रे ना, थे रे ना, धूम ताना थे रे ना
मेरे बाँके नाच की सैयां मची रूस में धूम
मैं हूँ पायल साजना और तू झंकारम
मैं मद्रासी…
सच पूछो तो मेरे दिल में प्यार इल्लई इल्लई
ओ बंगाली मेरा हो जा कहती है मिस पिल्लई
पप्पी तुझे पुकारती गंगोली यारम
मेरा हो जा साजना फिर पेडा पाडम
मैं बंगाली… -
फिल्म: अमर दीप, १९५८
संगीत: सी. रामचंद्र
गान: लता मंगेशकर
अभिनय: पद्मिनीमेरे मन का बावरा पंछी क्यों बार बार डोले
अंखियों में आज किसका रह रहके प्यार डोले
मेरे मन…
किसके ख़याल में ये नज़रें झुकी झुकी हैं
देखो इधर भी लब पर आहें रुकी रुकी हैं
तुम हो करार जिस दिल का नहीं बेक़रार डोले
मेरे मन…
दिल को लगन है उसकी मीठी नज़र हैं जिसकी
हम पास हैं तुम्हारे फिर दिल में याद है किसकी
तुम जो नज़र मिलाओ दिल में बहार डोले
मेरे मन…
कब से खड़ी हुई हैं कह दो तो लौट जाएँ
तुम्हें दूर ही से देखें हर दिन न पास आएँ
आँखों में जिंदगी भर तक तेरा इन्तेज़ार डोले
मेरे मन… -
फिल्म: काला पानी १९५८
संगीत: एस. डी. बर्मन
शब्द: मजरूह सुल्तानपुरी
गान: आशा भोंसले, मुहम्मद रफ़ी
अभिनय: मधुबाला, देव आनंदअच्छा जी मैं हारी चलो मान जाओ न
देखी सब की यारी मेरा दिल जलाओ न
छोटे से कुसूर पे ऐसे हो खफा
रूठे तो हुज़ूर थे मेरी क्या खता
देखो दिल न तोड़ो
छोड़ो हाथ छोड़ो
छोड़ दिया तो हाथ मलोगे समझे
अजी समझे
अच्छा जी…
जीवन के ये रास्ते लंबे हैं सनम
काटेंगे यह जिंदगी ठोकर ख़ाके हम
ज़ालिम साथ ले ले
अच्छे हम अकेले
चार क़दम भी चल ना सकोगे समझे
अजी समझे
अच्छा जी…
जाओ रे सकोगे ना तुम भी चैन से
तुम तो खैर लूटना जीने के मज़े
क्या करना है जीके
हो रहना किसीके
हम न रहे तो याद करोगे समझे
अजी समझे
अच्छा जी… -
फिल्म: काला पानी १९५८
संगीत: एस. डी. बर्मन
शब्द: मजरूह सुल्तानपुरी
गान: मुहम्मद रफ़ी
अभिनय: देव आनंदहम बेखुदी में तुमको पुकारे चले गए
सागर में ज़िंदगी को उतारे चले गए
देखा किये तुम्हें हम बनके दीवाना
उतरा जो नशा तो हमने यह जाना
सारे वे ज़िंदगी के सहारे चले गए हम…
तुम तो कहो हम खुद ही से खेले
डूबे नहीं हमी यूँ नशे में अकेले
शीशे में आपको ही उतारे चले गए हम… -
फिल्म: प्यासा, १९५७
संगीत: एस. डी. बर्मन
शब्द: सधीर लुधियानवी
गान: गीता दत्त
अभिनय: वहीदा रहमानजाने क्या तूने कही जाने क्या मैंने सुनी
बात कुछ बन ही गयी
सनसनाहट सी हुई थरथराहट सी हुई
जग उठे ख़्वाब कई बात कुछ बन ही गयी
जाने क्या…
नैन झुक झुके उठे पांव रुक रुके उठे
आ गई चाल नयी बात कुछ बन ही गयी
जाने क्या…
ज़ुल्फ़ शाने पे मुड़ी एक खुशबू सी उड़ी
खुल गई राज़ कई बात कुछ बन ही गयी
जाने क्या… -
फिल्म: पतिता, १९५३
संगीत: शंकर जयकिशन
गान: लता मंगेशकर
अभिनय: उषा किरणकिसी ने अपना बनाके मुझको मुस्कुराना सिखा दिया
अँधेरे घर में किसी ने हँसके चिराग जैसे जला दिया
शर्म के मारे मैं कुछ न बोली नज़र ने पर्दा गिरा दिया
मगर वह सब कुछ समझ गए हैं कि दिल भी मैंने गँवा दिया
किसी ने अपना…
न प्यार देखा न प्यार जाना सुनी थी लेकिन कहानियाँ
जो ख़्वाब रातों में भी न आया वह मुझको दिन में दिखा दिया
किसी ने अपना…
वे रंग बढ़ते हैं जिंदगी में बदल रहा है मेरा जहाँ
कोई सितारें लुटा रहा था किसी ने दामन बिछा दिया
किसी ने अपना… -
फिल्म: ठोकर, १९५३
संगीत: सरदार मल्लिक
गान: आशा भोंसलेऐ ग़म-ए-दिल क्या करूँ मैं वहश्त-ए-दिल क्या करूँ
मुझको किस्मत ने बनाया गदले पानी का कँवल
ख़ाक में मिल मिल गए सब आरजूओं के महल
क्या खवर थी यूँ मेरी तकदीर जायेगी बदल
ऐ ग़म-ए-दिल…
रुठनेवाले किसी मजबूर से रूठेगा क्या
जिसका है किस्मत ने लूटा यूँ कोई लूटेगा क्या
ऐ मेरे टूटे हुए दिल और तू टूटेगा क्या
ऐ ग़म-ए-दिल… -
फिल्म: अमर, १९५४
संगीत: नौशाद
शब्द: शकील बदायूनी
गान: आशा भोंसले
अभिनय: निम्मी, दिलीप कुमारइक बात कहूँ मेरे पिया सुन ले अगर तू ओ पिया सुन ले अगर तू
जब दिल में नहीं पाप तो फिर सोच न कर तू इक बात कहूँ
इक बात कहूँ…
छोटे से मेरे मन में है क्या कह नहीं पाऊँ मैं तो कह नहीं पाऊँ
कहते हुए शरमाऊँ भला कैसे बताऊँ मैं कैसे बताऊँ ओ
सब कुछ है इन आँखों में ज़रा देख इधर तू ओ पिया देख इधर तू
जब दिल में…
दो नैनों के पनघट पे लगे प्यार के मेले लगे प्यार के मेले
आंसू भी हैं मुस्कान भी जो चाहे सो ले ले जो चाहे सो ले ले ओ
साजन भरे बाज़ार से पानी न गुज़र तू पिया पानी न गुज़र तू
जब दिल में… -
फिल्म: अमर, १९५४
संगीत: नौशाद
शब्द: शकील बदायूनी
गान: लता मंगेशकर
अभिनय: मधुबाला, दिलीप कुमारओ तेरे सदके बलम न कर कोई ग़म यह समा यह जहाँ फिर कहाँ
दिन हैं सुहाने फिर कौन जाने आए न आए बहार
तू हमको पी ले दम भर को जी ले दुनिया का क्या एतबार
ओ जी पिया दुनिया का क्या एतबार तेरे सदके बलम…
काँटों में दामन उलझे न साजन फूलों में हंसकर गुज़ार
थोड़ी खुशी है थोड़ी हंसी है दुःख ज़िंदगी में हज़ार
ओ जी पिया दुःख ज़िंदगी में हज़ार तेरे सदके बलम…
नैया मिलन की मौजें पवन की कहती हैं तुझको पुकार
गाता चला चल हंसता चला चल जीवन की नदिया के पार
ओ जी पिया जीवन की नदिया के पार तेरे सदके बलम… -
फिल्म: आर पार, १९५४
संगीत: ओ.पी. नय्यर
शब्द: मजरूह सुल्तानपुरी
गान: शमशाद बेगम
अभिनय: कुमकुम, गुरु दत्त, श्यामाकभी आर कभी पार लागा तीर-ए-नज़र
सैयां घायल किया रे तूने मेरा जिगर
कितना संभाला बैरी दो नैनों में खो गया
देखती रह गई मैं तो जिया तेरा हो गया
दर्द मिला यह जीवन भर का मारा ऐसा तीर नज़र का
लूटा चैन करार
कभी आर…
पहले मिलन में यह तो दुनिया की रीत है
बात में गुस्सा लेकिन दिल ही दिल में प्रीत है
मन ही मन में लड्डू फूटे नैनों में फुलझडियाँ टूटे
होंठों पर तकरार
कभी आर…
मर्जी तिहारी चाहे मन में बसाओ जी
प्यार से देखूँ चाहे आँखों से गिराओ जी
दिल से दिल तकरा गए अब तो चोट जिगर पर खा गए अब तो
अब तो हो गया प्यार
कभी आर… -
फिल्म: सीमा, १९५५
संगीत: शंकर जयकिशन
शब्द: शैलेंद्र
गान: लता मंगेशकर
अभिनय: बलराज साहनी, नूतनमनमोहना बड़े झूठे
हारके हार नहीं माने
मनमोहना…
बनके खिलाड़ी पिया निकले अनाड़ी
मोसे बेईमानी करे मुझसे ही रूठे
मनमोहना…
तुम्हारी यह बांसी कान्हा बनी गल फांसी
तान सुनाके मेरा तन मन लुटे
मनमोहना… -
फिल्म: सीमा, १९५५
संगीत: शंकर जयकिशन
शब्द: शैलेंद्र
गान: मुहम्मद रफ़ी
अभिनय: बलराज साहनी, नूतनकहाँ जा रहा है तू ऐ जानेवाले
अंधेरा है मन का दिया तो जला ले कहाँ जा रहा है
यह जीवन सफर एक अंधा सफर है
बहकना है मुमकिन भटकने का डर है
संभलता नहीं दिल किसी के संभाले कहाँ जा रहा है
जो ठोकर न खाए नहीं जीत उसकी
जो गिरके संभल जाए है जीत उसकी
निशाँ मंजिलों के ये पैरों के छालें कहाँ जा रहा है
कभी यह भी सोचा कि मंजिल कहाँ है
बड़े से जहाँ में तेरा घर कहाँ है
जो बांधे थे बंधन वे क्यूँ तोड़ डाले कहाँ जा रहा है -
फिल्म: कठपुतली, १९५७
संगीत: शंकर जयकिशन
शब्द: शैलेंद्र
गान: सुबीर सेन
अभिनय: बलराज साहनी, वैजयंतीमालामंजिल वही है प्यार की रही बदल गए
सपनों की महफ़िल में हम तुम नए
दुनिया की नज़रों से दूर जाते हैं हम तुम जहाँ
उस देश की चाँदनी गाएगी यह दास्ताँ
मौसम था वह बहार का दिल थे मचल गए
सपनों की…
छुप न सके मेरे राज़ नग्मों में ढलने लगे
रूखा था फिर भी यह दिल पहलू बदलने लगे
ये दिन भी कुछ अजीब थे जो आज कल गए
सपनों की… -
फिल्म: कठपुतली, १९५७
संगीत: शंकर जयकिशन
शब्द: शैलेंद्र
गान: लता मंगेशकर
नाच: वैजयंतीमालाइतने बड़े जहाँ में ऐ दिल तुझको
तुझको अकेला छोडूँ कैसे तुझको
तू नादान लोग बेगाने इन संग
इन संग नाता जोड़ूँ कैसे इन संग
मत जा रे इन अनजानी गलियों से (मत जाओ मत जाओ)
मत जा रे इन अनजानी गलियों से
बचियो रे दुनियावाली छलियों से (बचियो रे बचियो)
तू इक जान शिकारी लाखों इनका
इनका निशाना तोडूँ कैसे इनका
मत ललचा गर काँटों में फूल भी है (मत ललचा रे)
मत ललचा गर काँटों में फूल भी है
पूछ किसी से दिल का लगाना भूल भी है (पूछ किसी से)
ढल जाए रात बिखर जाए सपने फिर से
फिर से इन्हें मैं जोड़ूँ कैसे फिर से
हाय न माना ज़ालिम गैर का हो ही गया (हो गया रे हो गया)
हाय न माना ज़ालिम गैर का हो ही गया
हारके सब कुछ मैं हूँ खड़ी दिल खो ही गया (खो गया रे खो गया)
जाता है तो जा दीवाने अब मैं
अब मैं तेरा जी तोडूँ कैसे अब मैं
इतने बड़े… -
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